बाल दिवस पर विशेष -बचपन -- बचपन गुलाब है बचपन गेंदे का खिलता फूल है बचपन में मौलश्री खिलती है बचपन में जुही की सुगंध है सारा का सारा बचपन हार सिंगार है यही बचपन भारत के भविष्य के आँगन में रंगोली सजायेगा इसको सहजना आपका हमारा सबका कर्तव्य है किन्तु ऐसा हो नही हो रहा है कहीँ गुलाब निराश हताश सड़क पर सोने को मजबूर या फिर पेट की आग बुझाने के लिये रोटी के लिये भीख माँगने को मजबूर |बालश्रम पर अनेकानेक: विचार: कानून है लेकिन बालक की रोटी की क्या व्यवस्था है इसकी भी मूल आवश्यकता है जमाने के साथ चलने की इस बचपन की भी इच्छा है इसीलिये बचपन कहीँ बर्तन साफ़ करता है तो कहीँ मज़दूरी करता है उसपर भी फटकार | जब कहीँ से कुछ नही मिलता तो ग़लत रास्ते पर चल पड़ता है कहीँ होमवर्क ना करने पर इतनी सजा पाता है कि रोंगटे खड़े हो जाते है | शिक्षा मन्दिर मौलश्री की सुरक्षा नही कर पर रहे है जूही अपनी सुगंध तलाश रही है | केवल बाल दिवस मनाना समस्या का समाधान नहीं है नेहरू जी ने देश के भविष्य को अपना जन्मदिन समर्पित किया था राजनीति को नही | मेरा समस्त बौद्धिक वर्ग से निवेदन है कि मनुष्य के पिता को बचाने का संकल्प ले | किसी ड्रेकुला से कली को बचाने का संकल्प ले | बचपन मनुष्य का पिता है क्योकि पाँच साल की उमर में उसका भविष्य बन जाता है| परिवार विद्यालय समाज सेवी संस्थाओं पर यह दायित्व आ जाता है कि वे इस बात पर ध्यान दे कि उनके संस्कारों को बनाने के लिए जो भोजन परसा जाता है वह शुद्ध हो | खिलते बचपन को नमस्कार हँसते झिलमिलतारे जैसे बचपन को नमस्कार
गुरुवार, 13 नवंबर 2014
बुधवार, 29 अक्टूबर 2014
विचार विश्लेषण - सच्चा वीर कौन ? जो सात्विक शक्ति का प्रयोग इसलिये करते है कि मानवता की अखंड मूर्ति खण्डित ना हो |लोकमंगल का धरातल स्थिर रहे | सच्चे वीर धीर वीर गम्भीर होते है सत्व गुण सागर में उनका अन्त;करण निरंतर स्नान करता है |वे लोक कल्याण के पथ पर जब चलते है तो प्रकृति उनकी सहचरी हो जाती है| बादल उनको छाया देते है | चाँद तारे उनके सत्व गुण के गवाह बनते है वृक्ष उनके लिए पंखा झलते है फूल उनका पथ सजाते है सुगन्धित करते है |सच्चे वीर किसी भी कारखाने में तैयार नही होते वे तो स्वत: भीतर ही भीतर पोषित होते है वे बात बात पर उत्तेजित डराते धमकाते नही है वे एक बहुत बडे लक्ष्य के लिए शक्ति को सहज कर रखते है | वीर आत्मचिंतन करते है समय के अनुसार कभी पीछे हटना है तो भी ठीक | राम ने युद्ध करने से पहले रावण को समझाने के लिए बहुत प्रयास किए किन्तु रावण जब नही माना तो मूल्यों की रक्षा के लिए युद्ध किया कृष्ण भी परिस्थिति वश युद्ध क्षेत्र छोड़ने के कारण रणछोड़ कह्लाये कृष्ण शक्ति का अपव्यय नही करना चाहते थे | उनको अपनी शक्ति धर्म की रक्षा के लिए बचानी थी | सच्चे वीर भीतर ही भीतर ही मार्च करते है समय आने पर बलिदान करने में पीछे नहीं रहते है | आज की शाम वीरों के नाम
सोमवार, 6 अक्टूबर 2014
रविवार, 5 अक्टूबर 2014
रावण अभी मरा नही --हर वर्ष विजयदशमी मानते है अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व है यह सत् की असत्त् पर विजय का पर्व है हर वर्ष रावण मारते है लेकिन पता नही क्यो ऐसा लगता है कि रावण मरा ही नही रावण मरेगा कैसे वह तो हमारे अन्दर छिप कर बैठा है जो मारता है वो किसी कलाकार की कृति है जिसमे महिनों श्रम करके रंग भरें है जब रावण जलता है तो उसे दुःख होना चाहिए लेकिन वह् खुश होता है क्योकि उसकी कलाकृति की रावण जलने से पहले खूब प्रशंसा होती है |अब जरा विचार करे बुराई एक प्रतीक को बनाने में महीनों का श्रम लगा पैसा लगा | हजारों लोगों को साक्षी बनाकर उसे जलाया जाता है खूब ख़ुशियाँ मनाते है कि आज बुराइयों के प्रतीक रावण को जला दिया लेकिन आस पास देखा तो रावण तो हँस रहा है वो तो अभी जिंदा है उसके सबसे बड़ा सिर तो अहंकार ही है फिर लोभ लालच मद मोह माया ईर्ष्या द्वेश वासना आसक्ति यह सब रावण के दस सिर है जब यह सब खत्म हो तब समझो हमने रावण को जीता | राम ने जिस रावण को मारा था वह परम् ज्ञानी और राजनीति का प्रकांड पंडित था | तिनके ओट में सीताजी बात करती थी | उसका साहस नही था कि वो सीता जी के साथ कोई अमर्यादित बात करे | मात्र कुदृष्टि रखने पर ही वह् पाप का भागी बना शिव भक्त होने पर भी उसमें अहंकार था |उसने एक समुदाय को असभ्य कह कर राज्य से निष्कसित कर दिया था |रावण ने अपने भाई विभीषण को लत मार कर सभा से बाहर कर दिया था रावण निरंकुश राजतंत्र का प्रतीक था इसीलिये राम ने उसका वध किया |आज रावण कितने रूपों में है सबसे बुरा रुप तो वासना का है जो डेढ़ वर्ष की बच्ची को भी हवस का शिकार बनाता है | एक बुरा रुप वो है जो देश रुपी वृक्ष की डालें काट कर अपना घर भरता है गरीब की झोपड़ी में दिया भी नहीं जलता भव्य स्वर्ण भवनों में रोशनी का कोई आर पार नही ऐश्वर्य तो उनका दास है ये गरीबों का हक् छीन कर ऐश करना उनका अधिकार है इन रावणों को कौन मरेगा ? सोचो| देश को आज ऐसे रक्षक राम की जरूरत है सबको राम बनने की जरूरत है| आशा भटनागर ।
गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014
नमामि भक्त वत्सलम्--- भारतीय वांगमय[वांड्मय} की शोभा है राम कथा और उसके कौस्तुभ मणि है श्री राम || वैसे तो रामकथा का प्रथम उन्मेष वाल्मीकि रामायण से है उसके बाद से राम कथा की सरिता अखंड रूप से प्रवाहित रही| कालिदास ने रघुवंश में भी राम कथा है | उत्तर रामचरित भवभूति का प्रसिद्ध नाटक है लेकिन तुलसी ने रामचरित मानस में रामकथा की ऐसी भागीरथी प्रवाहित की कि जितना स्नान करो उतना कम लगता है केशव की रामचंद्रिका और फिर गुप्त जी का साकेत |साकेत में उर्मिला केन्द्र में है किन्तु साकेत में राम का जो स्वरुप प्रस्तुत किया है वह आज सब के लिए प्रेरक है | राम के माध्यम से पर्यावरण के प्रति सजगता : कर्म निष्ठ्ता : आत्म विश्वास को है समाज में सबका मर्यादित व्यवहार हीअपेक्षित है राम ने स्वयम् कहा कि में आर्यों के आदर्श को बताने आया हूँ | जो शापित है भय ग्रस्त है राम उनके विश्वास है | राम का मनुष्यत्व धारण करने का उद्द्येश्य आत्म सुख नही है अपितु दूसरो का दुःख दूर् करना ही प्रमुख है वह करुणानिधि है साकेत में राम नर में ईश्वरता का आभास कराने का प्रयास कराते है |
राम कहते है कि भव में नव वैभव व्याप्त कराने आया
नर को ईश्वरता प्राप्त करने आया
संदेश यहां मै नही स्वर्ग का लाया
इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया |
जिनको रावण राज्य में असभ्य वानर कह कर अलग कर दिया था | राम ने उन्हे गले लगाया और कहा "बहु जन वन में है बने ऋक्ष-वानर से में दूँगा अब आर्यत्व उन्हें निज़ कर से"राम ने इन लोगों में शिक्षा और संस्कृति के विकास की बात कही|आज की राजनीति के लिएराम का चरित्र प्रेरणा है || सामाजिक व्यवस्था के लिए प्रकाश की किरण है राम इसलिए भगवान है क्योकि उन्होंने सदेव अपरिमित वर्ग के कल्याणका चिंतन किया इसीलिये राम ईश्वर है राम धर्म स्वरूप है राम का विरोध धर्म का विरोध है धर्म का विरोध है राम का विरोध है राम वो विराट चेतना है जो सब में रमण करती है अथवा सब जिसमें रमण करते है
सोमवार, 29 सितंबर 2014
kanyapoojan
कन्या पूजन की सार्थकता -अब अष्टमी आ रही है घर -घर से कन्याओं को पुकारा जायेगा बहुत अच्छा हे यह सब | मानस के सागर में अनेक प्रश्न ज्वार भाटे की तरह उठते रहते है क्या वास्तव में हम कन्या पूजन के अधिकारी है? क्या बालिका जो अभी नन्हीं सी कली है उसको खिलने का अवसर समाज में मिलता है | कितनी सुरक्षित है वह? प्रतिदिन दूरदर्शन कहता है कि नाबालिक हवस का शिकार हुई | स्कूल हो ; पार्क हो सड़क हो सब जगह हवस उसका पीछा करती रहती है | आज कन्या पूजन है कल वही कन्या हवस का शिकार होगी | मध्यकाल में सुरा सुंदरी का चलन प्रारम्भ हुआ था तब समाज में अनेक विकृतियां उत्पन्न हुई थी अनेक महान विभूतियों के प्रयासों से भारत में चेतना का सूर्य उदित हुआ अभी उसका पूरा प्रकाश फैला भी नही है कि भारत के व्योम पर काले बादल दिखने लगे है बाल विवाह :कन्या भ्रूण हत्या: जैसी समस्याएँ पुन; जीवित होगी| जब तक बालिका का कंचिका का कौमार्य सुरक्षित नही है तब तक कन्या पूजन का कोई अर्थ नही | अष्टमी एक संकल्प दिवस 'कन्या सुरक्षा दिवस" के रुप में आयोजित होना चाहिए | सरकारी स्तर पर कितने प्रयास हो आवश्यकता है मन के भीतर के शिव संकल्प की | ऐसा नही हुआ तो हर घर में दुर्गा होगी जो अनेक रुप में रक्तबीज जैसे राक्षस का संहार करेगी | कन्या तो गंगा है कन्या सोन परी सी परिवार को सजाती है रिमझिम सी शांत भी रहती है झिलमिल तारा सी चमकती है | सभी बौद्धिक वर्ग से निवेदन है कि कन्या पूजन को सार्थक करे
शनिवार, 27 सितंबर 2014
shakti poojan
शक्ति पूजा - एक विश्लेषण आज कल शक्ति पूजा के दिन है ये नौ दिन आश्विन मास के नवरात्रि {नव शक्तियों से संयुक्त ] आश्विन मास नवरात्रि भगवती का शयन काल है राम की शक्ति साधना से यह शयन - नवरात्र पूर्ण चैतन्य हुआ | इस प्रसंग को महाप्राण कवि निराला ने अपने शिखर काव्य राम की शक्ति पूजा में अधिक मुखरित किया है | इस कथा का उल्लेख परम्परागत राम काव्यो में नहीं है | इस कथा का मूल स्रोत देवी भागवत शिवमहिम्न स्तोत्र तथा कृत्तिवास रामायण में है | राम की शक्ति पूजा में निराला जी ने अपनी तूलिका से इस कथा को नया रंग दिया है | राम रावण का युद्ध चरम पर है |मेघनाथ आदि का वध हो चुका है | उस दिन के युद्ध में राम अमोघ बाण लक्ष्य भ्रष्ट होते है अथवा रावण को गोद में लिए श्यामा देवी राम को क्रोध से देखती है |राम के बाण मार्ग मे ही भस्म हो जाते है | हनुमान जी को छोड़ कर अन्य सब मूर्छित प्राय; हो जाते है उस दिन का युद्ध समाप्ति पर है राम सीता मुक्ति कैसे होगी यह सोचकर निराश है |अवसाद की मुद्रा में राम को देख कर विभीषण आदि राम को चैतन्य करने का प्रयास करते है |राम कह उठते है-"अन्याय जिधर है उधर है शक्ति'' तब जामवंत उन्हें दुर्गा की उपासना करने को कहते है | राम 108 इंदीवर से माँ की पूजा का संकल्प ले कर पूजा में लीन हो जाते है उनकी चेतना; कुण्डलिनी शक्ति मूलाधार स्वाधिष्ठान मणिपूर;अनाहत ;दिव्य आज्ञा चक्रों को पार करके सहस्रार चक्र तक पहुँचती है साधना का चरम क्षण है तभी रात्रि के दूसरे पहर में श्यामा देवी हँस कर अन्तिम फूल चुरा ले जाती है राम अन्तिम पुरश्चरण के लिए फूल खोजते है ना मिलने पर विकल हो जाते है तभी अंत;चेतना में प्रकाश होता है कि माता मुझे राजीव नयन कहतीं थी अभी दो नेत्र रुपी कमल शेष है इस संकल्प के साथ अपना दक्षिण नयन रुपी कमल अर्पित करने के लिए उद्यत होते है तभी देवी प्रकट होकर आशीर्वाद देती है -होगी जय होगी जय हे पुरुषोत्तम नवीन कह महाशक्ति राम के वदन में हुई लीन- -- कहने का अभिप्राय यह है क़ि राम ने साधना से स्वयं के आत्म विश्वास को चैतन्य किया |शक्ति पूजा से अभिप्राय यह ही है कि अपने भीतर की शक्ति को जाग्रत करें | देवी पूजन सात्विक शक्ति का आह्वान है असत् पक्ष के विनाश के लिए सत् की स्थापना केलिये सात्विक शक्ति को चैतन्य करना आवश्यक है और आत्म बल सुदृढ़ करना जरूरी है | निराला के शब्दों में -जन रंजन-चरण कमल धन्य सिंह गर्जित |
यह मेरा प्रतीक मात ! समझा में इंगित |
इसी भाव से करूँगा अभिनन्दित
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