तुम मेरे प्राणों की परिमिति
तुम मेरे स्पन्दन की भाषा |
ओ मेरे उल्लास मधुर स्वर-
तुम मेरे जीवन की आशा |
तुम मेरे श्वासो की सरगम |
तुम गतिलय मेरे गीतो की ||
ओ मेरे उत्ताप -शिथिल अधि-
मानस की चेतना मदिर -सी
तुम वासना मुक्त मादकता
तुम शाश्वत- अनुराग -भरित-मन
प्राणों का कर स्पर्श राग से -
तन मन में भर दिये ज्योति कण ||
तुम कोमल नवनीत सदृश हो |
शोभा -थकित चकित-सी पलपल||
वाणी मधुमय खग कल कूजन |
मन जैसे पावन गंगा जल||
तुम मेरे प्राणों की सम्बल .
तुम मेरे मन की अवलम्बन |
अन्तस् के गीतो की माला ---
से अर्पित करता अभिनन्दन ||
गुरुवार, 6 मार्च 2014
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