वन्दन का यह दीप समर्पित करते तुमको | श्रद्धा का यह गीत समर्पित करते तुमको ||
यह वन्दन 9अगस्त1942 के भारत छोडो आन्दोलन में शहीद हु़ए वीरों के लिए है || ऐसे नीव के प्रस्तरो के लिए वैख्ररी का यह भाव समर्पित है|
बहिनें रोली तिलक लगाती :
दो आँखें आँसू बरसाती |
माँ अपने कम्पित हाथों से
निज दुलार को पथ दिखलाती
मातृभूमि के अॅचल में चिर-
निद्रा में सोता बलिदानी |
जब तक अमर ज्योति जगती है |
तब तक गीत लिखे जायेंगे ||
शनिवार, 9 अगस्त 2014
9a 1944
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